Shaayar Kuldip

हँसी

Posted By on November 30, 2017 in Romantic | 3 comments

Spread the love

हँसी

पतझड़ भी सावन हो जाए
मुरझाई हर कली भी खिल जाए
बिना पंखों के उडें परिंदे
एक हँसी जो तेरी मिल जाए

चल साकी तू तोड़ पैमाने
बंद कर दो ये सब मयखाने
तेरे नषे से धरती तो क्या
आसमां में चाँद भी हिल जाए

गूँज उठे खुषिओं के तराने
दूर हो जाएँ दर्द पुराने
क्या ताजा क्या बासी यारा
दषक पुराने घाव भी सिल जाएँ

3 Comments

  1. kuldip singh February 20, 2018

    Nicely written, umnda

  2. Nitu February 20, 2018

    Nice feelings

    • adminkul February 22, 2018

      thanx

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *