Shaayar Kuldip

सिलसिला

Posted By on November 30, 2017 in Shikwa | 0 comments

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सिलसिला

करते हैं तुमसे प्यार हम पहले की तरह
कभी थी इनायतें, अब करते हैं गिला
गम नहीं कि वह इन्कार करता है
ग़म है कि चाहतों का यह सिला मिला
चुप रहकर भी हमको परेषान करते हैं
क्यों मिलता है खामोषियों का यह सिलसिला

 

’ सज़ा’

मेरी सज़ा है कि तमाम उमर
तेरे प्यार में तड़पूं
तुम मुझे याद करो या ना करो
मैं तेरी याद में तडपूं

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