Shaayar Kuldip

यादों की धूल

Posted By on November 30, 2017 in Social | 0 comments

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यादों की धूल

 

कोई किसी को झुकाने में लगा है
कोई किसी के सामने झुकने को तैयार
कोई दोस्तों में दुष्मन ढूँढ रहा है
तो कोई दुष्मनों में यार

नेकी करो तो बदी मिलती है
बुरा करो तो रावण बना देते हैं
जो डराता है उसके साथ हो जाते हैं
जो डरता है उसको और डरा देते हैं

सहारे ढूँढते हैं जीने के
आसरा मिल जाये तो गिला करते हैं
जख़्म देते हैं लोग अपना बनके
कई बैठ के जख्मों को सिला करते हैं

कोई किसी को सुधार रहा है
और कुछ खुद सुधर रहे हैं
कोई बाहर की चमक से खुष है
कई अंदर की गरीबी से गुज़र रहे हैं

 

कोई किसी को आगे बढ़ने से रोकता है
जो रुकता नहीं उसे रास्ता दे देते हैं
कोई किसी को गुनहगार ठहराता है
कई ना चाहके भी गुनहनागार बन जाते हैं

फिर भी कब तक चल़ते जायेंगे
एक दिन लौटना पडे़गा
फिर वही अपनी औकात पर
कि मैं इन्सान हूँ बस इन्सान हूँ
जो आता है चला जाता है
रह जाता है बस यादों की धूल बन कर

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