Shaayar Kuldip

फुटकर

Posted By on November 30, 2017 in SHER-O-SHAYARI | 1 comment

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फुटकर

हुस्न की जिंदा तस्वीर बन के बैठे हैं
ना जाने वो किसकी तकदीर बन के बैठे है
कत्ल हो रहा हैं किसी को खबर तक नहीं
फूल से लगते हैं षमषीर बन के बैंठे हैं
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होगी कोई खता मुझको सजा मिली
माँगते थे मौत पर जिन्दगी मिली
दूरियाँ मजबूरियाँ मेरा रोग बन गई
दर्द ही मिला ना कोई दवा मिली
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मेरे यार मुझे अपनी पनाहों में रखना
तेरी नज़रों के जादू से हूॅ जिंदा
हमेंषा मुझे अपनी निगाहों में रखना
चलते-चलते मिल जाऐ तू मंजिल बनके
बस मुझे ऐसी ही राहों पे रखना
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1 Comment

  1. Majid March 4, 2018

    Aapki shayri sun k shayri Mai interest aagya
    Very good sir

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