Shaayar Kuldip

ढूँढता खुद में अगर

Posted By on November 30, 2017 in Shikwa | 0 comments

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ढूँढता खुद में अगर

ना अपना बनाया हमसफर
ना जाने दिया किसी और दर
तेरे षहर की तन्हाई में
यू भटकते रहे दर-बदर

कोई और जंचता ही नहीं
दिल में बसा तू इस कदर
छलकती आँखों के संग
है गुज़रता मेरा सफ़र

इल्जा़म ही मिलते रहे
मिली प्यार की ना इक नज़र
बेगाने होते ना कभी
मुझे ढूँढता खुद में अगर

मेरे मसीहा तुम ही हो
सर झुकता है तेरे ही दर
दौर मुष्किल ही सही
चाहेंगे तुमको ता उमर

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