Shaayar Kuldip

जो भी यहाँ बोते हैं

Posted By on November 30, 2017 in Social | 0 comments

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जो भी यहाँ बोते हैं

रात की मौत से ओस के बनते आँसू
फिर कहीं जा के उजालों के जन्म होते हैं
जिन्दगी का यही दस्तूर तो फिर क्या गम है
पाते हैं हम खुषी और कभी हम खोते हैं

बंद कर आँख को चलते रहें बेपरवाह
चुभे जब पाँव में काँटा तो क्यों रोते हैं
भूख दौलत की पलकों से है गायब नीदें
जिनको सबर है, वही चैन से घर सोते हैं

तुम ख्यालों में सदा ही ख्वाब ही बुनते रहना
मेहनतों से सुनो हासिल मुकाम होते हैं
है कर्मभूमि ये जिंदगी संभल के चलो
हमको मिलता है वही जो भी यहाँ बोते हैं

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