Shaayar Kuldip

जलते रहे

Posted By on November 30, 2017 in Tere Liye | 1 comment

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जलते रहे

लौ तो थी फिर भी अंधेरे में रहे
 हम चिरागों की तरह जलते रहे
 भीड़ तो थी इक जमाने की मगर
 बिन तेरे तनहा ही बस चलते रहे

देखते ही देखते वो खो गया
 पलकों पे अरमान ही पलते रहे
 तू तो मेरा रहनुमा ना बन सका
 आसूओं के कारवाँ बनते रहे

मस्जिदों में हम दुआ तेरी हुए
 मंदिरो में बनके घंटियाँ बजते रहे
 तू चला जिन राहगुज़ारों पे सदा
 फूल बनके पाँव में सजते रहे

 

1 Comment

  1. RAVIT March 28, 2018

    Bahut khoobsurat

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