Shaayar Kuldip

किनारा ही नहीं

Posted By on November 30, 2017 in Social | 0 comments

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किनारा ही नहीं

चल षायर तेरा इस षहर में गुजा़रा ही नहीं
बेदर्द हैं लोग यहाँ कोई दर्द का मारा ही नहीं

भटक रही है कष्ती उल्फत के समंदर में
दूर तलक ऐ मांझी कोई किनारा ही नहीं

लोग फुटपाथों पे जिन्दगी बसर करते हैं।
आप कहते यहाँ किस्मत का कोई मारा ही नहीं

दौलते गर्द से पत्थर तो सजा रखें हैं
घरों में प्यार और कोई प्यार का मारा ही नहीं

ना तो खुषबू है और हवाओं में न रवानी कोई
चमन तो है पर दिलकष कोई नज़ारा ही नहीं

संग हाथों में और नफ़रत लिए आँखों में
झूठ की जयकार है सच किसी को गंवारा ही नहीं

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